उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में खाद्य पदार्थों की खराब गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कई उत्पाद मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद अदालत ने चार अलग-अलग कंपनियों पर कुल 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
न्याय निर्णायक अधिकारी मुक्ता मिश्र की अदालत ने यह फैसला सुनाया। विभाग के सहायक आयुक्त अश्वनी कुमार सिंह के अनुसार, अलग-अलग मामलों में लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूने जांच में फेल पाए गए थे।
पहले मामले में, मार्च 2022 में बड़ेथी बाईपास पर एक वाहन से लाए जा रहे पनीर का सैंपल लिया गया था। जांच में उसमें निर्धारित मात्रा से कम फैट पाया गया। इस पर गाजियाबाद की कंपनी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
दूसरे मामले में, नौगांव से लिए गए रिफाइंड तेल के नमूने में एसिड वैल्यू अधिक पाई गई, जिसके कारण उसे अधोमानक घोषित किया गया। इस पर गुजरात की कंपनी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
तीसरे मामले में, ज्ञानसू की एक दुकान से लिए गए सरसों तेल के नमूने में भी गड़बड़ी मिली। इस पर आगरा की कंपनी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
चौथे मामले में, भटवाड़ी क्षेत्र से लिए गए दूध के नमूने में भी फैट की मात्रा सही नहीं पाई गई। इस पर संबंधित दुग्ध कंपनी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
इसके अलावा, पिछले साल एक रेस्टोरेंट में खाना दूषित करने के मामले में एक व्यक्ति पर भी 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अदालत ने सभी दोषियों को 30 दिन के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। समय पर भुगतान न करने पर राशि की वसूली भू-राजस्व के रूप में की जाएगी।
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता करने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त कदम उठा रहा

