शहीद 27 वर्षीय पिथौरागढ़ जवान
पिथौरागढ़ जिले के गनकोट गांव में शुक्रवार को शोक और गर्व का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला, जब सिक्किम में हिमस्खलन की चपेट में आकर शहीद हुए 27 वर्षीय जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जवान की शहादत की खबर से पहले ही गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी, लेकिन जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
जवान के घर पहुंचते ही पूरा वातावरण गमगीन हो गया। परिवार के सदस्य और नजदीकी रिश्तेदार अपने वीर सपूत को आखिरी बार देखने के लिए इकट्ठा हुए। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई अपनी आंखों में आंसू लिए था। शव के पास खड़े लोग भावुक होकर शहीद की बहादुरी और देशभक्ति को याद कर रहे थे।
शहीद के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों और पिथौरागढ़ के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में लोग गनकोट पहुंचे। लोगों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए जवान के साहस और बलिदान को सलाम किया। पूरे गांव में देशभक्ति का माहौल था और हर तरफ ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर जवान अमर रहे’ के नारों से वातावरण गूंज उठा।
जवान की अंतिम यात्रा पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भी इस दौरान मौजूद रहकर शहीद को सम्मानजनक विदाई सुनिश्चित की। अंतिम यात्रा में शामिल लोग जवान के साहसिक कार्यों और अपने प्राणों की आहुति देने की भावना को याद करते हुए भावुक हो गए।
शहीद जवान की शहादत ने न केवल उनके परिवार को गहरा आघात दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र और देशवासियों में वीर जवानों के प्रति गर्व और सम्मान की भावना पैदा की। उनका बलिदान एक उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और साहस की सीख देता रहेगा।
अंतिम संस्कार के दौरान गांववासियों ने शहीद के सम्मान में ढोल-नगाड़े और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ उन्हें विदाई दी। शहीद की वीरता और त्याग की गाथा हमेशा गनकोट और पिथौरागढ़ के लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

