
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पंचायत चुनाव ड्यूटी निभा रहे दो मतदान कर्मी दुर्घटनाग्रस्त हो गए। एक मतदान कर्मी की बूथ तक पहुंचते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि दूसरे पीठासीन अधिकारी का पैर बदहाल रास्ते पर फिसलने से टूट गया। यह हादसे राज्य में पंचायत चुनावों के दौरान मतदान कर्मियों की चुनौतियों को उजागर करते हैं।
मंगलवार को मुनस्यारी विकासखंड में 60 पोलिंग पार्टियों को मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया गया। इन बूथों में कई दुर्गम और दूरस्थ इलाकों में स्थित हैं, जहां सड़क से कोई सीधा संपर्क नहीं है। इन्हीं में एक था प्राथमिक विद्यालय गोल्फा का बूथ, जो सड़क से लगभग चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर स्थित है।
सीएमओ कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक मनीष पंत (44 वर्ष) इसी बूथ की टीम में शामिल थे। पैदल चढ़ाई के दौरान अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द उठा और कुछ ही मिनटों में वह बेहोश होकर गिर पड़े। साथियों ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों की टीम ने हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि की। प्रशासन ने रेस्क्यू टीम भेजकर शव को निकाला और मनीष पंत की जगह एक अन्य कर्मचारी को बूथ के लिए रवाना किया।
वहीं, दूसरे हादसे में पीठासीन अधिकारी गौरव कुमार चामी भैंसकोट बूथ की ओर जा रहे थे। बारिश से खराब हुए रास्ते पर अचानक फिसलकर वह गिर पड़े और उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। उन्हें टीम द्वारा रेस्क्यू कर नाचनी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया।
दोनों घटनाओं के बाद चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए सवाल खड़े हो गए हैं। दुर्गम इलाकों में चुनाव कराना जहां लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है, वहीं मतदान कर्मियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन को गंभीरता से सोचने की जरूरत है आरओ दिगंबर आर्या ने कहा कि मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है और हरसंभव सहायता दी जाएगी। मतदान केंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है और शेष बूथों के लिए मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी है।