कोटद्वार “मोहम्मद दीपक” मामला: हाईकोर्ट ने याचिका की निस्तारण, जांच में सहयोग के निर्देश
कोटद्वार में चर्चित “मोहम्मद दीपक” प्रकरण को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दीपक कुमार द्वारा दायर याचिका को निस्तारित करते हुए उन्हें कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता पुलिस जांच में पूरा सहयोग करें और अनावश्यक रूप से सोशल मीडिया गतिविधियों से दूर रहें, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।
मामले की सुनवाई के दौरान दीपक कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि घटना में शामिल लोगों के नाम बताए जाने के बावजूद पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज किया। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ को शांत कराने की कोशिश करने वाले दीपक के खिलाफ ही पुलिस ने उल्टा मामला दर्ज कर लिया।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि घटना के समय दीपक कुमार मौके पर मौजूद थे और उनका भीड़ के साथ धक्का-मुक्की करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसी आधार पर पुलिस ने दीपक सहित 22 लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि पूरे प्रकरण में अब तक पांच एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और जांच जारी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि मामले की जांच अभी लंबित है और इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
इससे पहले 19 मार्च की सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई थी। अदालत ने सवाल उठाया था कि जब कोई व्यक्ति स्वयं एक संदिग्ध आरोपी है, तो वह पुलिस सुरक्षा की मांग किस आधार पर कर सकता है। कोर्ट ने इस तरह की याचिकाओं को जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने और मामले को अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाने का प्रयास बताया था।
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह भी लाया गया कि घटना के बाद दीपक कुमार को समर्थकों से आर्थिक सहयोग मिला। इस पर अदालत ने पूछताछ की, जिसके जवाब में दीपक ने बताया कि उन्हें लगभग 80 हजार रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था, जिसके बाद उन्होंने अपने खाते की गतिविधियां बंद कर दीं।
पूरे मामले की शुरुआत 26 जनवरी 2026 को हुई थी, जब कोटद्वार में एक दुकान के नाम “बाबा” को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने नाम पर आपत्ति जताई, जिससे मौके पर तनाव बढ़ गया। इसी दौरान जिम संचालक दीपक कुमार दुकानदार के समर्थन में सामने आए। जब भीड़ ने उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और मामला प्रदेश सहित देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
फिलहाल, हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि मामले की आगे की दिशा अब पुलिस जांच पर निर्भर करेगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप या प्रचार-प्रसार उचित नहीं माना

