
हरिद्वार में सावन माह की शिवरात्रि और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर धर्मनगरी में सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। गंगा घाटों से लेकर प्रमुख शिव मंदिरों तक शिवभक्तों की भीड़ देखी गई, जो गंगा जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं।
श्रद्धालु दक्षेश्वर महादेव मंदिर, तिलभांडेश्वर मंदिर, नीलेश्वर महादेव, गुप्तेश्वर महादेव, पशुपतिनाथ मंदिर और बिल्केश्वर महादेव जैसे प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि जलाभिषेक का ब्रह्ममुहूर्त सुबह 4:15 से 4:56 बजे तक रहा। इसके बाद दिनभर शिवभक्तों ने पूजन-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में हरिद्वार में लाखों कांवड़िए गंगा से जल भरकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। अब तक करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान और जलाभिषेक कर चुके हैं। नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार सावन शिवरात्रि की पूजा चार पहरों में की जाती है—प्रथम पहर शाम 7:27 से 10:07 बजे तक, दूसरा पहर 10:07 से रात 12:46 तक, तीसरा पहर 12:46 से सुबह 3:28 तक और चौथा पहर सुबह 3:28 से 6:07 बजे तक।
हरिद्वार के घाटों और मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। कांवड़ियों की भारी संख्या के कारण प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्थाओं को कड़ा कर दिया है। भक्तों का मानना है कि सावन शिवरात्रि पर की गई पूजा से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।