केदारनाथ
केदारनाथ धाम से जुड़ी रूप छड़ी और मुकुट के गायब होने की चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है। इस मामले को लेकर अब सियासी और धार्मिक हलकों में भी सवाल उठने लगे हैं। विधानसभा सत्र के बाद पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वहीं इस पूरे मामले पर केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम की परंपराएं बहुत प्राचीन हैं और सोशल मीडिया पर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।
रावल ने बताया कि वीरशैव लिंगायत धर्म में पांच प्रमुख पीठों का विशेष महत्व है। इनमें रामभपुरी, उज्जैनी, केदार, श्रीशैल और काशी शामिल हैं। केदार पीठ ऊखीमठ वैराग्य पीठ है, जो चारों युगों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार धर्म प्रचार के लिए रावल को रूप छड़ी, मुकुट और अन्य धार्मिक सामग्री अपने साथ रखने का अधिकार होता है। यह सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था का हिस्सा है।
रावल ने यह भी बताया कि केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में मुकुट धारण करने की परंपरा निभाई जाती है। इसी परंपरा के तहत वे कई धार्मिक कार्यक्रमों में रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल होते रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2016 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में भी वे रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल हुए थे। इसी तरह इस वर्ष भी पांच से 12 फरवरी तक नांदेड़ में आयोजित शिव कथा और विश्व शांति यज्ञ कार्यक्रम में वे इन धार्मिक प्रतीकों के साथ मौजूद थे।
रावल के अनुसार फरवरी महीने में रूप छड़ी की विधिवत पूजा और साधना की गई थी। इसके बाद नियमों के अनुसार इसे सुरक्षित रूप से जमा भी कर दिया गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर रूप छड़ी और मुकुट के गायब होने की जो चर्चा हो रही है, वह पूरी तरह गलत है।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन और सरकार की नजर बनी हुई है। वहीं मंत्री के जांच के बयान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी और फैली हुई अफवाहों पर विराम लगेगा।
