देहरादून: राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” की ओर से महापंचायत आयोजित की गई। इस महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दलों, राज्य आंदोलनकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। वक्ताओं ने एक सुर में मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग उठाई।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान ने कहा कि जांच की दिशा पर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना था कि सीबीआई जांच किसी बाहरी व्यक्ति की शिकायत के बजाय पीड़िता के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन लोगों पर सबूत मिटाने के आरोप हैं….उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाए।
संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं दिखाई दे रही है और इसलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मंच न्याय की लड़ाई अंत तक जारी रखेगा।
महापंचायत में शामिल अन्य वक्ताओं ने भी यही सवाल उठाया कि शिकायतकर्ता का पीड़ित परिवार से कोई सीधा संबंध नहीं बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच का आधार वही होना चाहिए जो परिवार ने दिया है। साथ ही घटना के पीछे के संभावित कारणों और साक्ष्यों की गहराई से पड़ताल की मांग की गई।
भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि लंबे समय से चल रहे जनआंदोलन के दबाव में सरकार ने सीबीआई जांच की घोषणा तो की…लेकिन यह भी सवाल है कि इतनी देरी क्यों हुई। उनका कहना था कि महापंचायत में मौजूद सभी संगठनों ने स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

महापंचायत के अंत में संघर्ष मंच ने कहा कि आज लिए गए निर्णयों पर सभी सहयोगी संगठन एकजुट रहेंगे और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
