नंदा देवी राजजात
चमोली: उत्तराखंड की आस्था और परंपरा से जुड़ी विश्वप्रसिद्ध श्रीनंदा देवी राजजात 2026 को स्थगित किए जाने के फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के विरोध में चमोली जिले के नंदानगर ब्लॉक सभागार में 484 गांवों की महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, तीर्थ पुरोहित, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
नंदा देवी राजजात हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली हिमालय की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा है। करीब 280 किलोमीटर लंबी यह यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलती है। इस वर्ष अगस्त–सितंबर माह में प्रस्तावित इस हिमालयी महाकुंभ को श्रीनंदा राजजात समिति, नौटी ने स्थगित करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

महापंचायत में मां नंदा धाम कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र पर उच्च स्थान दिलाने और कुरुड़ से नंदा की बड़ी जात प्रारंभ करने की मांग प्रमुख रूप से उठी। मां नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति का कहना है कि राजजात को स्थगित करना आस्था के साथ खिलवाड़ है और इससे क्षेत्र की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचेगा।
राजजात समिति ने यात्रा स्थगित करने के पीछे कई कारण बताए हैं। समिति के अनुसार इस वर्ष मलमास होने के कारण यात्रा सितंबर के अंत तक समाप्त होती, जिससे बुग्यालों में बर्फ पड़ने की संभावना रहती। इसके अलावा राजजात के पड़ावों पर आवश्यक ढांचागत सुविधाओं का अभाव और प्रशासन के पुनर्विचार पत्र को भी निर्णय का आधार बनाया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि अब वसंत पंचमी के अवसर पर यह तय किया जाएगा कि राजजात किस वर्ष आयोजित की जाएगी।
कांसुवा से नौटी, होमकुंड और पुनः नौटी तक होने वाली सचल महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात का इंतजार अब और लंबा हो गया है। बीते तीन वर्षों से इस यात्रा की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अचानक स्थगन के फैसले से श्रद्धालु और स्थानीय लोग मायूस हैं।
महापंचायत में वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि सरकार और राजजात समिति पुनः विचार करे और आस्था से जुड़े इस महापर्व को समय पर आयोजित करने के लिए ठोस निर्णय ले। अब सबकी निगाहें वसंत पंचमी पर होने वाली घोषणा पर टिकी हैं।
