Chaitra Navratri 2026(samvaad365): आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो गई है। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से माता की आराधना कर सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में सती थीं। कथा के अनुसार, एक बार दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया…जिसमें उन्होंने कई देवी-देवताओं को आमंत्रित किया…लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। सती अपने पिता के यज्ञ में जाने के लिए उत्सुक थीं। भगवान शिव ने बिना निमंत्रण जाने से मना किया…लेकिन सती के आग्रह पर उन्हें जाने की अनुमति दे दी।
जब सती यज्ञ स्थल पर पहुंचीं तो वहां भगवान शिव के प्रति अपमान और तिरस्कार का भाव देखकर उनका मन व्यथित हो गया। दक्ष प्रजापति द्वारा शिवजी के बारे में अपमानजनक बातें कहे जाने से सती को गहरा दुख हुआ। अपने पति का यह अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने शरीर की आहुति दे दी।
पौराणिक मान्यता है कि अगले जन्म में सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और मां शैलपुत्री के नाम से पूजी गईं।
मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत शांत और करुणामयी माना जाता है। माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल होता है। देवी नंदी बैल पर सवार रहती हैं…इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।
मां शैलपुत्री की पूजन विधि
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र को लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित किया जाता है। माता को सफेद रंग की वस्तुएं विशेष रूप से प्रिय मानी जाती हैं….इसलिए उन्हें सफेद वस्त्र, सफेद फूल और सफेद मिठाई का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा नारियल, दूध या दूध से बनी मिठाई और गाय के शुद्ध घी से बने पकवान भी अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से मनचाहा वर प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
स्तोत्र पाठ से मिलता है सौभाग्य का आशीर्वाद
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोहः विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसी के साथ देवी की पूजा की शुरुआत होती है। इस वर्ष घटस्थापना का पहला शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक भी घटस्थापना की जा सकती है।

