देहरादून: उत्तराखंड के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अब आवारा कुत्तों के मामलों में विशेष जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने परिसर और आसपास के क्षेत्रों में घूमने वाले आवारा कुत्तों की गिनती करें और सुरक्षा उपायों की जानकारी जमा कराएं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। इसी कड़ी में संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पत्र जारी कर कहा है कि वे तत्काल अपने परिसर और आसपास के आवारा कुत्तों की स्थिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संस्थान यह भी बताएंगे कि कुत्तों को हटाने या पुनर्वासित करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है और नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत को इस बारे में सूचना दी गई है या नहीं। साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि परिसर में चारदीवारी या तारबाड़ मौजूद है या नहीं। जहां सुरक्षा के लिए ये उपाय नहीं हैं….वहां छात्रों की सुरक्षा के लिए क्या वैकल्पिक कदम उठाए गए हैं, इसकी भी विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।
एडी उनियाल, संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा ने कहा कि आवारा कुत्तों की गिनती और सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्देश जारी किए गए हैं। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है।
हालांकि कुछ संस्थानों से अब तक आवश्यक जानकारी नहीं मिल पाई है। 24 दिसंबर तक सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों को यह रिपोर्ट नगर पालिका, नगर निगम और नगर पंचायत को भेजने के निर्देश थे….लेकिन कई जगह यह सूचना अभी तक नहीं पहुंची। देहरादून नगर निगम की नगर आयुक्त ने भी कहा कि अब तक ऐसी कोई जानकारी उन्हें नहीं मिली है।

उत्तराखंड सरकार और उच्च शिक्षा विभाग छात्रों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी संस्थानों से रिपोर्ट जल्द प्राप्त करने का प्रयास जारी है।
