
नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव और कथित अपहरण प्रकरण पर सोमवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। लापता बताए गए पांच सदस्य कोर्ट में पेश हुए, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब सदस्य खुद ही बयान दे चुके हैं कि वे लापता नहीं थे, तो अब उनकी कहानी सुनने का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायालय ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अपहरण हुआ ही नहीं था तो पुलिस ने इन सदस्यों को कस्टडी में क्यों लिया। कोर्ट ने नैनीताल की डीएम और एसएसपी को निर्देश दिए कि अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा एफिडेविट के जरिए पेश करें। सुनवाई के दौरान एसएसपी पीएन मीणा ने भरोसा दिलाया कि वायरल वीडियो में अपहरण में शामिल दिख रहे सभी आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के सहयोगी अधिवक्ता कामत ने री-पोलिंग की मांग भी उठाई, जिस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभी सुनवाई केवल चुनाव के दिन हुई घटनाओं तक सीमित है।
सोमवार को नैनीताल सुरक्षा के लिहाज से पुलिस छावनी में तब्दील रहा। हाईकोर्ट परिसर के 500 मीटर दायरे में धारा 163 लागू की गई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो भी देखे और इस पर चिंता जताई।
इस बीच, एक और जिला पंचायत सदस्य का वीडियो सामने आया जिसमें उसने कहा कि वे अपहरण नहीं हुए, बल्कि अपनी मर्जी से घूमने गए हैं और जल्द लौटेंगे। इससे पहले एक अन्य सदस्य भी ऐसा ही बयान जारी कर चुका था। घटनाक्रम के बीच जिला पंचायत के अधिवक्ता रविन्द्र सिंह बिष्ट ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि 20 साल तक पंचायत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला, लेकिन हाल की घटनाओं से जनता में भय का माहौल बन गया है, इसलिए वे पद छोड़ रहे हैं।
इधर, भाजपा प्रत्याशी दीपा दरम्वाल ने गोल्ज्यू देवता मंदिर में अर्जी लगाकर न्याय की गुहार की। उनका आरोप है कि कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पा नेगी के समर्थकों ने सदस्यों का अपहरण कर निर्वाचन प्रमाणपत्र छीने। अब मंगलवार को भी इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी।