
प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आज से चार दिवसीय मानसून सत्र शुरू हो गया है। 19 से 22 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है। सदन में लगभग 550 से अधिक सवाल रखे जाएंगे, जो मंत्रियों की परीक्षा लेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जो वित्त मंत्री का दायित्व भी संभाल रहे हैं, अनुपूरक बजट पेश करेंगे।
ये होंगे प्रमुख विधेयक
सत्र के दौरान सरकार नौ अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2025, अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, साक्षी संरक्षण (निरसन) विधेयक, समान नागरिकता (संशोधन) विधेयक, लोकतंत्र सेनानियों की सुविधाएं बढ़ाने संबंधी विधेयक और पंचायत राज संशोधन विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा अनुपूरक विधेयक भी सदन में पेश होगा।
अध्यक्ष की अपील
सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सत्ता और विपक्ष दोनों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा को बनाए रखते हुए विधायक अपने क्षेत्रों के जनमुद्दों को मजबूती से रखें ताकि विकास पर गहन चर्चा हो सके।
विपक्ष के तेवर और सरकार की रणनीति
विपक्ष ने शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, आपदा प्रबंधन और पंचायत चुनावों में गड़बड़ी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार हर सवाल का मजबूती से जवाब देने को तैयार है और विभागों की वार्षिक लेखा रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत की जाएगी।
हंगामे के आसार
सत्र की शुरुआत से ही माहौल गरमाने के आसार हैं। विपक्ष का तेवर आक्रामक रहने वाला है, जबकि सत्ता पक्ष ने भी पलटवार की रणनीति तैयार कर ली है। ऐसे में गैरसैंण का यह मानसून सत्र केवल विधायी कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक टकराव और भविष्य की सियासी दिशा का संकेत भी देगा। इस सत्र में प्रदेश की नीतियों, योजनाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर गहन बहस होने की संभावना है। जनता की नजरें गैरसैंण विधानसभा पर टिकी हैं कि आखिर यह मानसून सत्र राज्य के विकास के ठोस फैसले लाता है या फिर हंगामे की भेंट चढ़ जाता है।