ब्रिक्स समिट
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन को लेकर राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस के करीब 15 हजार जवानों के साथ अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां तैनात की गई हैं। नई दिल्ली के प्रमुख इलाकों को ब्रिक्स की थीम पर सजाया गया है।
इस सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई साझेदार देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया ब्रिक्स के सदस्य हैं।
शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में बैठकर भारत मंडपम में आयोजित प्रदर्शनी के लिए रवाना हुए। दोनों नेताओं के बीच नॉर्दर्न सी रूट और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भी भेंट किया। भारत और रूस के बीच बढ़ते सहयोग के बीच इस मुलाकात को खास माना जा रहा है।
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। सम्मेलन के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। भारत और चीन के बीच सहयोग को लेकर दुनियाभर की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा का भी भारत पहुंचने पर स्वागत किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम समेत कई नेता सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
सऊदी अरब की ओर से विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद और संयुक्त अरब अमीरात की ओर से अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान शामिल होंगे। ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा भी दिल्ली पहुंच चुके हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन के साथ बिजनेस फोरम पर भी खास जोर है। व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच बड़ी संख्या में बैठकें हो रही हैं। टैरिफ, भुगतान व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स, खाद्य सुरक्षा और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
खास बात यह है कि ब्रिक्स अब दुनिया की प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का बड़ा मंच बन चुका है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर नई चुनौतियां सामने हैं, भारत में आयोजित यह सम्मेलन आने वाले दिनों में ब्रिक्स की दिशा और सदस्य देशों के आपसी संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

