देहरादून। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच राजधानी देहरादून में खांसी, जुकाम, बुखार और छींक जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में लोगों के बीच स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता भी बढ़ने लगी है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि इन लक्षणों का मतलब हर बार स्वाइन फ्लू होना नहीं है। सामान्य वायरल संक्रमण में भी लगभग इसी तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बिना घबराए सावधानी बरतना जरूरी है।
दून अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. विजय भंडारी के मुताबिक मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों सामान्य वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। खांसी, जुकाम, बुखार और छींक आने पर तुरंत स्वाइन फ्लू मान लेना सही नहीं है। शुरुआती स्तर पर सावधानी बरतने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। चिकित्सक के अनुसार हर व्यक्ति को स्वाइन फ्लू की जांच कराने की आवश्यकता नहीं होती।
प्रदेश में 50 से ज्यादा मामले
उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों के दौरान स्वाइन फ्लू के 50 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम और मरीजों के उपचार को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि स्वाइन फ्लू के मामलों की जानकारी सामने आने के बाद अनावश्यक रूप से डरने के बजाय सावधानी बरतें।
स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे ही हो सकते हैं। यही वजह है कि कई लोग सामान्य सर्दी-जुकाम को भी स्वाइन फ्लू समझकर परेशान हो जाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लक्षणों की गंभीरता और मरीज की स्थिति के आधार पर ही आगे की जांच और उपचार की जरूरत तय की जानी चाहिए।
गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
यदि खांसी-बुखार के साथ स्थिति बिगड़ने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर छाती में दर्द या खांसी के दौरान खून आना जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। ऐसे मामलों में अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से जांच और उचित उपचार कराना चाहिए।
संक्रमण से बचने के लिए बरतें सावधानी
- लक्षण दिखाई देने पर घर पर आराम करें और अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।
- संक्रमण फैलने की आशंका हो तो मास्क का इस्तेमाल करें।
- संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें।
- तबीयत बिगड़ने या गंभीर लक्षण आने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि खांसी, जुकाम या बुखार को देखकर तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने या गंभीर होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए। मौसम बदलने के दौरान सावधानी, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय सलाह संक्रमण से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है।

