अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को एक बार फिर अदालत से राहत नहीं मिली। सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं न्यायालय ने खारिज कर दी हैं। प्रदेश सरकार के मुताबिक, मामले में मजबूत पैरवी के चलते आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी। सरकार का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा सुनिश्चित करने के लिए शुरुआत से ही गंभीरता के साथ कार्रवाई की गई।
सरकार के अनुसार, घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लगातार प्रभावी पैरवी की गई। सरकार का दावा है कि इसी के चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां कई बार खारिज हुईं और मुकदमे के दौरान उन्हें जेल में ही रहना पड़ा। बाद में अदालत ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
सरकार ने यह भी बताया कि अंकिता के परिवार की मांगों को ध्यान में रखते हुए तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। वहीं, परिजनों की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश भी दिए गए। परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ अंकिता के भाई और पिता को नौकरी भी उपलब्ध कराई गई।
अंकिता हत्याकांड में कथित ‘VIP’ को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस भी जारी है। सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि बिना ठोस तथ्य या साक्ष्य के इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की गई। सरकार का कहना है कि यदि किसी के पास इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण था, तो उसे जांच एजेंसियों या न्यायालय के सामने रखा जाना चाहिए था।
प्रदेश सरकार का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता रही है। सरकार के मुताबिक, गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, चार्जशीट, प्रभावी पैरवी और दोषियों को सजा तक पहुंचाने की प्रक्रिया में हर स्तर पर कार्रवाई की गई।

