उत्तराखंड में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राज्य के कई जिलों में बुधवार को झमाझम बारिश दर्ज की गई, जिससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं पहाड़ी इलाकों में बारिश आफत भी बनकर सामने आई। लगातार बारिश और घने कोहरे के कारण मसूरी में जनजीवन प्रभावित रहा, जबकि कई स्थानों पर सड़कें बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मसूरी में सुबह से रुक-रुककर हो रही बारिश और घने कोहरे के चलते वाहनों की रफ्तार धीमी रही। दृश्यता कम होने से यातायात प्रभावित हुआ और पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं हरिद्वार, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, गौचर, लंगासू, नारायणबगड़, देवाल और थराली समेत कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। बारिश से मौसम सुहावना हो गया और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली।
हालांकि चमोली जिले के देवाल-खेता मानमती मोटर मार्ग पर सुयालकोट क्षेत्र में भारी बारिश के कारण मलबा और पत्थर आने से सड़क करीब 15 घंटे तक बंद रही। मंगलवार रात बंद हुआ मार्ग बुधवार सुबह जेसीबी मशीन की मदद से मलबा हटाने के बाद यातायात के लिए खोला गया। सड़क बंद रहने के दौरान 24 से अधिक वाहन रास्ते में फंसे रहे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में स्थायी रूप से जेसीबी मशीन तैनात करने की मांग की है।
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि बरसात के दौरान सड़कों को जल्द खोलने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में दो-दो जेसीबी मशीनों की व्यवस्था की जा रही है। वहीं सुयालकोट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त मशीनें भी तैनात की जाएंगी।
इधर, उत्तराखंड आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने मौसम विज्ञान विभाग के तीन दिन के ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है, वहां एसएमएस के माध्यम से लोगों को अलर्ट भेजने की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने खासतौर पर चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। लगातार बारिश को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और आपदा प्रबंधन की टीमें अलर्ट मोड पर हैं।

