केंद्रीय विद्यालय
उत्तराखंड के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और पलायन पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय आज भी जमीन और भवन जैसी बुनियादी जरूरतों के अभाव में शुरू नहीं हो पाए हैं। नतीजा यह है कि बेहतर शिक्षा का सपना देख रहे हजारों छात्र-छात्राओं को अब भी अपने क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
राज्य में कई केंद्रीय विद्यालयों को स्वीकृति मिलने के बावजूद उनका संचालन शुरू नहीं हो सका है। टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में वर्ष 2025 में केंद्रीय विद्यालय को मंजूरी मिली थी, लेकिन अब तक न तो विद्यालय के लिए भूमि उपलब्ध हो पाई है और न ही भवन की व्यवस्था हो सकी है। इसी वजह से स्कूल का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
वहीं देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र के लिए प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय भी जमीन के अभाव में शुरू नहीं हो सका। चकराता में भूमि उपलब्ध न होने के कारण इसे कालसी ब्लॉक के जड़वाला क्षेत्र में संचालित करने की योजना बनाई गई। ग्रामीणों ने स्कूल के लिए निशुल्क भूमि भी उपलब्ध कराई, लेकिन इसके बावजूद विद्यालय में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।
चमोली जिले के सवाड़ क्षेत्र में तो ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर केंद्रीय विद्यालय के लिए 15 कमरों का टिन शेड, शौचालय और खेल मैदान तक तैयार कर दिया। इतना ही नहीं, गांव के लोगों ने करीब सौ नाली भूमि भी विद्यालय के नाम पर दान कर दी। इसके बावजूद पिछले वर्ष स्वीकृत विद्यालय में अब तक कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में उत्तराखंड के प्रत्येक ब्लॉक में केंद्रीय विद्यालय खोलने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। इसे ऑल वेदर रोड परियोजना के बाद राज्य के लिए एक बड़ी सौगात माना गया था। राज्य सरकार ने भी निर्धारित मानकों के अनुसार निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने की सहमति दी थी और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि जमीनी स्तर पर भूमि और भवन की व्यवस्था नहीं हो पाई।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक ब्लॉक में केंद्रीय विद्यालय खुलते हैं तो बच्चों को घर के नजदीक बेहतर शिक्षा मिलेगी और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी। पूर्व संयुक्त सचिव सीबीएसई डॉ. रणवीर सिंह के अनुसार केंद्रीय विद्यालयों का संचालन शुरू कराने में केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

