असम
असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए दर्दनाक विमान हादसे में उत्तराखंड ने अपना एक और वीर सपूत खो दिया है। देहरादून के विकासनगर निवासी स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह भारतीय वायु सेना के उस एएन-32 परिवहन विमान में सवार थे, जो 13 जून को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में वायु सेना के पांच जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के प्रशांत सिंह भी शामिल हैं।
देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र स्थित श्रीरामपुरम कॉलोनी में जैसे ही प्रशांत सिंह के शहीद होने की खबर पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। 32 वर्षीय प्रशांत सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। करीब आठ वर्षों से भारतीय वायु सेना में सेवाएं दे रहे प्रशांत की यह दूसरी पोस्टिंग थी।
सबसे भावुक कर देने वाली बात यह है कि प्रशांत सिंह का विवाह महज डेढ़ साल पहले, 23 नवंबर 2024 को हुआ था। परिवार ने उनके साथ कई सपने संजोए थे, लेकिन विमान हादसे ने उन सभी उम्मीदों को एक झटके में तोड़ दिया। शहादत की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
प्रशांत सिंह के पिता उमेश सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता बृजेश देवी गृहिणी हैं। परिवार में एक बड़ी बहन हैं, जिनका विवाह हो चुका है। बेटे की शहादत की सूचना मिलते ही माता-पिता असम के जोरहाट के लिए रवाना हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रशांत सिंह बेहद सरल, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे। उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र को गर्व और गम दोनों से भर दिया है।
सहसपुर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, नगर पंचायत अध्यक्ष सुमित चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने शहीद स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी ने कहा कि देश ने अपना एक बहादुर सैनिक खो दिया है, लेकिन उनका साहस, समर्पण और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

