देहरादून (उत्तराखंड): केदारनाथ यात्रा में हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन अब नए और सुरक्षित पैदल मार्ग पर तेजी से काम कर रहा है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद बनाए गए मौजूदा रास्ते को विशेषज्ञों ने पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना है। ऐसे में अब मंदाकिनी नदी के राइट बैंक यानी पुराने पारंपरिक मार्ग की ओर नया ट्रैक तैयार किया जा रहा है।
चारधाम यात्रा के दौरान सोनप्रयाग से गौरीकुंड और फिर केदारनाथ तक भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मौजूदा पैदल मार्ग पर श्रद्धालु, घोड़े-खच्चर और कंडी एक साथ चलते हैं, जिससे कई जगह जाम जैसी स्थिति बन जाती है। रास्ता संकरा होने के कारण हादसे का खतरा भी बना रहता है।
वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट एमपीएस बिष्ट के अनुसार, 2013 से पहले केदारनाथ का पारंपरिक रास्ता मंदाकिनी नदी के राइट बैंक पर था, जो वैज्ञानिक दृष्टि से अधिक सुरक्षित माना जाता था। यह हिस्सा धूप वाला क्षेत्र है, जहां ग्लेशियर कम हैं और भूस्खलन का खतरा भी कम रहता है। लेकिन 2013 की आपदा में रामबाड़ा समेत पुराना मार्ग पूरी तरह बह गया था।
आपदा के बाद जल्दबाजी में मंदाकिनी के लेफ्ट बैंक की ओर नया रास्ता बनाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मार्ग नदी के कटाव वाले हिस्से और मलबे (डेबरीस) पर बना है, जिससे भविष्य में खतरा बढ़ सकता है।
एमपीएस बिष्ट ने बताया कि विस्तृत अध्ययन के बाद पुराने मार्ग से ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में हार्ड रॉक पर नया सुरक्षित रास्ता डिजाइन किया गया है। यह वर्तमान मार्ग से करीब एक किलोमीटर छोटा भी है। साथ ही यहां ग्लेशियर और भूस्खलन का खतरा कम बताया जा रहा है।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि नए मार्ग पर स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और बारिश से बचाव के लिए शेड जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। काम पूरा होते ही इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

प्रशासन की योजना है कि नया रास्ता यात्रियों के लिए इस्तेमाल होगा, जबकि घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पुराने ट्रैक पर ही रहेगी। इससे भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और केदारनाथ यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित बन सकेगी।
