देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों में आग फैलाने वाली चीड़ की पत्तियां यानी पिरुल अब कमाई का जरिया बनती जा रही हैं। सरकार इसे बेकार समझने के बजाय एक उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है।
राज्य में पिरुल से ब्रिकेट्स और पैलेट्स बनाने की पहल शुरू की गई है, जिससे जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। अभी तक 9 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं और इन्हें बढ़ाकर 57 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
पिरुल को स्थानीय लोगों से 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जा रहा है, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इसके बाद इसे ईंधन के रूप में उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक के अनुसार इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी वृद्धि होगी।

यह योजना जंगलों को आग से बचाने और हरित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
