अर्थ ऑवर
उत्तराखंड में शनिवार रात मनाया गया अर्थ ऑवर इस बार उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। जहां एक ओर लोगों से पर्यावरण संरक्षण के संदेश के तहत एक घंटे तक गैर-जरूरी लाइटें और विद्युत उपकरण बंद रखने की अपील की गई थी, वहीं दूसरी ओर राजधानी देहरादून समेत कई जिलों में इसका असर बेहद सीमित देखने को मिला।
राजधानी देहरादून में रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक अर्थ ऑवर के दौरान भी बाजारों और प्रमुख स्थानों पर रोशनी सामान्य रूप से जलती रही। घंटाघर और आसपास के इलाकों में भी लाइटें बंद नहीं हुईं, जिससे यह साफ हो गया कि इस अभियान को लेकर जागरूकता और सहभागिता दोनों ही स्तर पर कमी रही।
हालांकि कुछ घरों और सीमित इलाकों में लोगों ने स्वेच्छा से लाइट बंद कर इस पहल का समर्थन किया, लेकिन बड़े स्तर पर इसका प्रभाव नहीं दिख पाया। कई लोगों को अर्थ ऑवर के बारे में जानकारी ही नहीं थी, जिसके चलते वे इस अभियान में शामिल नहीं हो सके।
उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे जिलों में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे। यहां न तो किसी तरह का ब्लैकआउट देखने को मिला और न ही आम लोगों में इसको लेकर खास उत्साह नजर आया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर बिजली कटौती से जुड़ी अफवाहें जरूर देखीं, लेकिन आधिकारिक जानकारी के अभाव में भ्रम की स्थिति बनी रही।
दरअसल, अर्थ ऑवर एक वैश्विक अभियान है, जिसे वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के तहत आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करना है। उत्तराखंड शासन की ओर से भी इस अभियान को लेकर अपील की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित ही रहा।

यह स्थिति साफ संकेत देती है कि ऐसे अभियानों की सफलता के लिए सिर्फ अपील पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनजागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। आने वाले समय में अगर इस दिशा में बेहतर प्रयास किए जाएं, तो पर्यावरण संरक्षण की यह पहल और प्रभावी बन सकती है।
