कॉमर्शियल गैस संकट
देहरादून में गैस सिलेंडर की कमी का असर अब आम लोगों की थाली पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शहर में ढाबों और ठेलियों पर मिलने वाली रोटी पहले के मुकाबले महंगी हो गई है।
पहले जहां एक रोटी 7 से 8 रुपये में मिल जाती थी, अब वही रोटी 12 से 15 रुपये तक बिक रही है। इससे रोजाना बाहर खाना खाने वाले लोगों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
ढाबा और ठेली चलाने वाले लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर न तो समय पर मिल रहे हैं और न ही आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। कई बार बुकिंग करने के बाद भी सिलेंडर देर से मिल रहा है। इस वजह से उनका काम प्रभावित हो रहा है।
पटेल नगर और आसपास के क्षेत्रों में काम करने वाले ठेली संचालकों ने बताया कि उन्हें मजबूरी में रोटी और खाने के दाम बढ़ाने पड़े हैं। उनका कहना है कि जब खर्च बढ़ता है, तो दाम बढ़ाना जरूरी हो जाता है, वरना नुकसान उठाना पड़ता है।
कुछ ढाबा संचालकों ने बताया कि गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद उन्हें एक सप्ताह तक नया सिलेंडर नहीं मिला। ऐसे में उन्हें लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। चूल्हे पर खाना बनाने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है, जिससे काम धीमा हो जाता है और खर्च भी बढ़ता है।
राजपुर रोड के एक ढाबा संचालक ने बताया कि उनका सिलेंडर खत्म हुए कई दिन हो चुके हैं और अब तक नया नहीं मिला है। वहीं, कारगी क्षेत्र के एक ठेली चालक ने बताया कि गैस की कमी के कारण उन्हें रोटी के दाम करीब 3 रुपये तक बढ़ाने पड़े हैं।
इस गैस संकट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। जो लोग पहले सस्ती रोटी खाकर अपना गुजारा करते थे, अब उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर, गैस सिलेंडर की कमी ने छोटे कारोबारियों और आम जनता दोनों की परेशानी बढ़ा दी है। अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं।

