अमित शाह
उत्तराखंड में आगामी चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हरिद्वार में आयोजित जनसभा के साथ ही भाजपा ने राज्य में चुनावी शंखनाद कर दिया है। इस जनसभा के जरिए भाजपा सरकार और संगठन की समीक्षा के साथ मिशन 2027 की तैयारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रही है।
भाजपा लगातार नौ वर्षों से राज्य में सत्ता में है और पार्टी तीसरी बार लगातार जीत हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस जनसभा के लिए हरिद्वार को रणनीतिक रूप से चुना गया है।
हरिद्वार को चुनने के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण 2022 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। उस चुनाव में हरिद्वार जिले की 11 सीटों में से भाजपा को केवल तीन सीटों पर जीत मिली थी, जबकि बाकी सीटें कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई थीं। ऐसे में भाजपा इस जिले में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
दूसरा बड़ा कारण हरिद्वार का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हरिद्वार को हिंदुत्व और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां से दिया गया राजनीतिक संदेश राज्य के साथ-साथ देशभर में प्रभाव डाल सकता है।
तीसरा कारण राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा है। उत्तराखंड की राजनीति में मैदानी जिलों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों से होकर ही सत्ता का रास्ता गुजरता है। इन क्षेत्रों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को पहले भी अच्छी सफलता मिलती रही है, इसलिए भाजपा यहां अपनी रणनीति को और मजबूत करना चाहती है।
अमित शाह की जनसभा के बाद भाजपा की एक महत्वपूर्ण टोली बैठक भी आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, संगठन महामंत्री अजय कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और तीरथ सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

इस बैठक में मिशन 2027 को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी और पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी चुनावों की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि अमित शाह कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र भी देंगे, जिससे भाजपा तीसरी बार लगातार सत्ता में वापसी की तैयारी को और मजबूत कर सके।
