देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उन्नत चिकित्सा तकनीक का सफल उदाहरण पेश करते हुए गर्दन की गंभीर चोट से जूझ रहे एक मरीज को नया जीवन दिया है। उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ निवासी 30 वर्षीय नरेश राणा लकड़ी काटते समय पेड़ से गिर गए थे, जिससे उनकी गर्दन के पिछले हिस्से में गंभीर चोट आ गई।
परिजन उन्हें तुरंत दून अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि उनकी गर्दन की दूसरी कशेरुका (C2) के ऊपरी हिस्से में फ्रैक्चर है। यह चोट बेहद संवेदनशील मानी जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर लकवा या जान का खतरा भी हो सकता है। मरीज ने तेज दर्द और गर्दन हिलाने में असमर्थता की शिकायत भी की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्थि रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने तुरंत सर्जरी का निर्णय लिया और जटिल C2 ओडोन्टोइड एंटीरियर फिक्सेशन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। डॉक्टरों के अनुसार यह आधुनिक, न्यूनतम इनवेसिव और नॉन-फ्यूजन स्पाइन सर्जरी तकनीक है, जिससे गर्दन की प्राकृतिक गतिशीलता—जैसे दाएं-बाएं घुमाने और ऊपर-नीचे झुकाने की क्षमता—सुरक्षित रहती है। सर्जरी के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हुआ और अब अपने पैरों पर चलने लगा है।

मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने ऑर्थो सर्जन डॉ. विक्रांत और उनकी टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण है।
