Uttarakhand Marriage Registration : उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। सरकार ने पहले दी गई शुल्क छूट और समय सीमा बढ़ाने की राहत को अब समाप्त कर दिया है। यानी अब विवाह पंजीकरण तय समय के भीतर कराना अनिवार्य होगा और देरी होने पर विलंब शुल्क भी देना पड़ेगा।
क्या बदला है अब?
प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण, तलाक पंजीकरण और वसीयत पंजीकरण के लिए फीस तय की गई थी। शुरुआत में लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार ने दो बार छह-छह महीने की छूट दी थी।
26 जनवरी 2026 तक विवाह पंजीकरण मुफ्त रखा गया था
विलंब शुल्क भी एक साल तक स्थगित किया गया था
लेकिन अब इस राहत को आगे बढ़ाने का कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है। इसका मतलब साफ है अब पंजीकरण शुल्क भी देना होगा और देरी पर जुर्माना भी लगेगा।
समय पर पंजीकरण क्यों जरूरी?
नियमों के अनुसार 26 मार्च 2010 के बाद हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। साथ ही नई व्यवस्था में विवाह होने के बाद तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
अब कितनी देनी होगी फीस?
सरकार द्वारा तय किया शुल्क
विवाह पंजीकरण शुल्क: 250
तत्काल पंजीकरण शुल्क: 2500
विलंब पंजीकरण शुल्क: 200
90 दिनों से अधिक देरी पर: 300 (हर तीन माह की अवधि को एक इकाई मानकर गणना)
अधिकतम विलंब शुल्क: 10,000 तक

आम जनता के लिए संदेश
अब मुफ्त पंजीकरण की सुविधा खत्म हो चुकी है….इसलिए जिन दंपतियों ने अब तक विवाह पंजीकरण नहीं कराया है वे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लें। देरी करने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। सरकार का उद्देश्य सभी विवाहों का कानूनी रिकॉर्ड सुनिश्चित करना है…ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के दस्तावेजी विवाद से बचा जा सके।
