मां नंदा की परंपरागत यात्रा
गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की परंपरागत यात्रा को लेकर चमोली जिले में एक नई बहस शुरू हो गई है। वर्षों से ‘नंदा राजजात’ के नाम से जानी जाने वाली इस ऐतिहासिक यात्रा को पहली बार ‘मां नंदा की बड़ी जात’ का नाम दिया गया है। नंदानगर विकासखंड सभागार में आयोजित महापंचायत में यह अहम निर्णय लिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि मां नंदा की बड़ी जात का आयोजन वर्ष 2026 में ही किया जाएगा।
महापंचायत में तय हुआ कि आगामी 23 जनवरी को वसंत पंचमी के पावन अवसर पर कुरुड़ स्थित मां नंदा के सिद्धपीठ मंदिर में बड़ी जात के शुभारंभ का मुहूर्त निकाला जाएगा। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चली इस महापंचायत में क्षेत्र के हक-हकूकधारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व ग्रामीण शामिल हुए।
मां नंदा की लोकजात प्रतिवर्ष आयोजित होती है, जबकि आदिकाल से चली आ रही 12 वर्षीय परंपरा वाली यात्रा को राजजात कहा जाता रहा है। लेकिन इस बार सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति और नंदा राजजात समिति नौटी के बीच एकराय न बनने के कारण राजजात के स्थान पर ‘बड़ी जात’ नाम से आयोजन का निर्णय लिया गया। बड़ी जात का नेतृत्व कुरुड़ मंदिर समिति करेगी, जिसमें बधाण, दशोली, लाता और बंड क्षेत्र के हक-हकूकधारी शामिल होंगे।
विवाद की जड़ तब सामने आई जब नंदा राजजात समिति नौटी ने अगस्त-सितंबर में यात्रा को जोखिम भरा बताते हुए और मलमास का हवाला देकर राजजात को 2026 के बजाय 2027 में आयोजित करने का फैसला लिया। कुरुड़ मंदिर समिति ने इस निर्णय पर कड़ा एतराज जताया और इसे एकतरफा बताया। महापंचायत में कहा गया कि इस फैसले में कुरुड़ समिति से कोई राय नहीं ली गई, जो परंपराओं के खिलाफ है।
बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पिछले आठ महीनों से शासन-प्रशासन के स्तर पर गुहार लगाई जा रही थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अब राजजात के नाम को परिवर्तित कर मां नंदा की बड़ी जात का आयोजन करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया है।

महापंचायत के बाद कुरुड़ स्थित मां नंदा के सिद्धपीठ मंदिर में विशेष पूजाएं आयोजित की गईं। मंदिर समिति अध्यक्ष सुखवीर रौतेला के नेतृत्व में हुई पूजा-अर्चना में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां नंदा की आस्था और परंपराओं की रक्षा के लिए वे हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
