सिलेंडर
देहरादून में रसोई गैस की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। शहर में हजारों परिवार घरेलू गैस सिलेंडर का इंतजार कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कई फास्ट-फूड की दुकानों और ढाबों में घरेलू गैस का खुलेआम व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई और छापेमारी के बावजूद यह प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही है।
जानकारी के अनुसार, शहर में करीब 67 हजार से अधिक घरों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति लंबित है। इसके कारण कई परिवारों को रोजमर्रा की रसोई चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर शहर के कई इलाकों में घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल होते देखा गया है, जो नियमों के अनुसार पूरी तरह अवैध है।
शहर के पटेलनगर से लेकर कारगी चौक तक की गई पड़ताल में कई फास्ट-फूड दुकानों और रेहड़ियों पर घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग होता मिला। कुछ दुकानदारों ने सिलेंडर को कपड़े या बोरे से ढककर रखा था, ताकि यह सामान्य नजर आए और कार्रवाई से बचा जा सके।
दरअसल, व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत घरेलू सिलेंडर की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में कई छोटे व्यापारी खर्च बचाने के लिए घरेलू सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के चलते प्रशासन ने शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थानों को छोड़कर अन्य प्रतिष्ठानों के लिए व्यावसायिक गैस की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। इसी वजह से घरेलू सिलेंडर के अवैध उपयोग के मामले बढ़ रहे हैं।
गैस संकट का असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। लालपुल-कारगी मार्ग स्थित वेंडिंग जोन में रेहड़ी लगाने वाले कई विक्रेताओं ने बताया कि व्यावसायिक सिलेंडर खत्म होने के बाद नया सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके कारण कई लोगों को मजबूरन अपनी दुकानें बंद रखनी पड़ीं। जिला पूर्ति विभाग की टीमें लगातार शहर में निरीक्षण कर रही हैं। अब तक कई स्थानों से घरेलू गैस सिलेंडर जब्त भी किए गए हैं। जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने बताया कि घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। निरीक्षण के दौरान जहां भी ऐसा पाया जा रहा है, वहां सिलेंडर जब्त किए जा रहे हैं और आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने आम लोगों और व्यापारियों से नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि गैस आपूर्ति की स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं।
