देहरादून: बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध में देशभर के शिक्षक आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के फैसले के बाद करीब 25 लाख शिक्षकों में असंतोष बताया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता वर्ष 2011 से लागू की गई थी…जबकि इससे पहले नियुक्त शिक्षक अपनी निर्धारित योग्यता के आधार पर सेवा में आए थे। ऐसे में 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस व्यवस्था से छूट दी जानी चाहिए।
अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुभाष चौहान ने कहा कि शिक्षकों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देगी…लेकिन इस संबंध में अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की गई है।
उन्होंने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 22 फरवरी को इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अभियान चलाकर की जाएगी। इसके बाद 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 26 फरवरी को जिला मुख्यालयों में मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए मार्च के अंतिम सप्ताह में दिल्ली के जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित करने की योजना है।

शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। साथ ही उत्तराखंड के शिक्षकों से भी आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की अपील की गई है।
